भारतीय रूपए का इतिहास
भारतीय रूपए का इतिहास

भारतीय मुद्रा का इतिहास सदियों पुरानी बात है जब भारतीय रूपए की शुरुआत हुई थी उस समय Indian Rupee चाँदी और सोने के सिक्के हुआ करतें थे रुपये शब्द का प्रयोग सबसे पहले शेरशाह सूरी ने अपने शासन के दौरान किया था Indian Rupee in Hindi का प्रयोग 6वीं सताब्दी में शुरू हो गया था लेकिन 6वीं सताब्दी में 5 चिन्हित दस्तावेजों वाले रुपयों का प्रयोग किया जाता था भारत में पहला कागज का नोट (1770-1832) में जारी किया गया था

जिन Indian Currency को आज हम रुपए के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं। उसे भारत में सदियों से प्रयोग किया गया है। लेकिन बहुत समय पहले Indian Coins चांदी और सोने के हुआ करते थे। और लगभग 18वीं सदी तक भारत में चांदी और सोने के सिक्कों का प्रयोग किया गया था। भारत में जब यूरोप और अन्य देशों के लोग व्यापार करने के लिए आने लगे। उसी दौरान भारत में एक निजी बैंक की स्थापना की गई।

भारतीय मुद्रा का इतिहास सिक्कों की शुरुआत कब हुई?

भारत में सिक्को का प्रचलन बहोत पुराने इतिहास से किया जा रहा है इसका प्रारंभ 6वीं शताब्दी में किया गया था। उस समय सिक्कों को दस्तावेजों और 5 चिन्हित सिखों के रूप में निर्मित किया गया था। भारत में विभिन्न राज्यों के दौरान सिक्कों की डिजाइन बदलती गई

भारत में कागज के नोट की शुरुआत कब हुई?

भारतीय मुद्रा का इतिहास
भारतीय मुद्रा का इतिहास

भारतीय मुद्रा का इतिहास बहोत अनोखा है भारत में कागजी नोट को सबसे पहले बैंक ऑफ हिंदुस्तान द्वारा जारी किया गया। सन् (1770-1832) तक इसे प्रयोग किया गया था। उसके बाद बैंक ऑफ़ बंगाल द्वारा नोटों को जारी किया गया। जो केवल एक तरफ ही छापे जाते थे। मैं सोने की एक मोहन बनी होती थी। और यह 100,250,500 वर्गों में था इसके बाद नोट में एक बेलबूटा बनाया गया था। Indian Rupee में नोटों पर एक महिला की आकृति और व्यापार का मानवीकरण दर्शाया गया था। और इसे दोनों तरफ छापा गया था। सबसे पहले भारतीय नोटों में 3 भाषाओं का प्रयोग किया गया था। उर्दू, बंगाली, और देवनागरी, इन नोटों में पीछे की तरफ बैंक की छपाई होती थी। 1800 सदी के अंत में नोटों के मूल भाव ब्रितानी हो गए। जाली नोटों पर रोक लगाने के लिए उनमें कई बदलाव किए गए।

  1. दी उदय कुमार कौन है

  2. भारतीय रूपए का चिन्ह कब बनाया गया

  3. How to add Rupee Symbol in MS-Word
  4. What is INR क्या है 

भारतीय मुद्रा का इतिहास ब्रिटिश भारत

ब्रिटिश भारत ने 1825 में रजत मानक प्रणाली को अपनाया था। बीसवीं शताब्दी के अंत तक इसका प्रयोग किया गया। भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था लेकिन इसमें पाउंड स्टर्लिंग को कभी नहीं अपनाया था। 18 सो 66 में वित्तीय प्रतिष्ठान ध्वस्त हो गया था और 1 साल बाद कागज के पैसों को ब्रिटिश सरकार द्वारा नियंत्रित किया गया था इस दौरान राष्ट्रीय पद के बैंकों को नष्ट कर दिया गया था

भारतीय मुद्रा का इतिहास रुपयों के भिन्न-भिन्न नाम

भारतीय मुद्रा का इतिहास
भारतीय मुद्रा का इतिहास

भारत के कई शहरों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं। इसलिए भारतीय मुद्रा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

  • हिंदी में रूपए को (रुपए) के नाम से जाना जाता है। 
  • गुजराती में रुपए को (रूपियो) के नाम से जाना जाता है।
  • तेलुगु में रुपए को (రూపాయి) के नाम से जाना जाता है।
  • तुलु भाषा और कन्नड़ में रुपए को (रूपाई) के नाम से जाना जाता है।
  • तमिल में रुपए को (रुबाई) के नाम से जाना जाता है।
  • मलयालम में रुपए को रूपा के नाम से जाना जाता है।
  • मराठी में रुपए को (रुपये) के नाम से जाना जाता है।
  • संस्कृत में रुपए को (रूप्यकम और रुप्यंक) के नाम से जाना जाता है।
  • पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम, उड़ीसा, और असम, में रुपए को (तनक) के नाम से जाना जाता है।  
  • बंगाल में रुपए को (टका) के नाम से जाना जाता है। 
  • असमिया में रुपए को (तोका) के नाम से जाना जाता है। 
  • ओड़िया में रुपए को (टंन्का) के नाम से जाना जाता है। 

भारतीय रुपए का आधिकारिक चिन्ह कब चुना गया

भारतीय मुद्रा का इतिहास
भारतीय मुद्रा का इतिहास
  • जब अधिकारिक तौर पर रुपया का चिन्ह नहीं था। तब भारतीय मुद्रा के चिन्ह को दर्शाने के लिए (Re, Rs और, Rp) का प्रयोग किया जाता था।
  • भारतीय मुद्रा का इतिहास का चिन्ह 15 जुलाई 2010 को आधिकारिक तौर पर चुना गया था। 
  • भारतीय रुपया के चिन्ह को डी उदय कुमार ने डिजाइन किया है। और वह गुवाहाटी में आईआईटी कॉलेज के प्रोफेसर हैं। 
  • भारतीय मुद्रा का इतिहास का चिन्ह पूरे विश्व में पांचवें नंबर पर है जिससे उसके प्रतीक चिन्ह से पहचाना जाता है।
  • रुपए के चिन्ह को बनाने के लिए एक प्रतियोगिता रखी गई थी जिसमें 3000 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था। 
  • रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने भारतीय संस्कृति और भारतीय सभ्यताओं के साथ भारतीय रुपया के चिन्ह को चयन करने की सिफारिश की थी और इसे UNIC CODE में शामिल करने का आवेदन किया गया है।
  • भारतीय रुपया के चिन्ह को यूनिकोड में U+20A मिल गया जो पहले सही Rs जैसे दिखने वाले चिन्ह के लिए था। 
  • रुपए के चिन्ह को कंप्यूटर में दर्शाने के लिए कुछ non-unicode font बनाए गए हैं।

भारतीय मुद्रा का नाम सबसे पहले किसने लिया था

भारतीय रुपया का इतिहास
भारतीय रुपया का इतिहास

में सन् 1540-1565 तक शेरशाह सूरी का शासन था। उसी दौरान रुपए शब्द का प्रयोग सबसे पहले शेरशाह सूरी ने किया था। शेरशाह सूरी के शासन में चांदी और सोने के सिक्कों का प्रयोग किया जाता था। जिनका वजन 11.534 ग्राम से 14 ग्राम तक होता था। उस दौरान तांबे के सिक्कों को दाम कहा जाता था और चांदी के सिक्कों को मोहर कहा जाता था। जिस भारतीय मुद्रा का इतिहास को आज हम उपयोग करते हैं सबसे पहले रूपए का नाम शेरशाह सूरी ने अपने शासन के दौरान किया गया था जिसे भारत में ब्रिटिश राज के दौरान भी प्रयोग किया गया था। ब्रिटिश राज के दौरान सिक्के का भार 11.6 होता था जिसमें 91.4% चांदी होता था 19वीं सदी में जब दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था सोने के मानक पर आधारित थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में सोने के सिक्कों के मुकाबले चांदी के सिक्के बहुत ज्यादा होने के कारण चांदी के सिक्कों में काफी गिरावट आई। कुछ समय बाद भारत की मुद्रा से अन्य देशों में कुछ खरीदने में काफी दिक्कत आने लगी। इस घटना को  भारतीय रूपए के गिरावट के नाम से जाना जाता है।

भारतीय मुद्रा का इतिहास भारतीय कांग्रेसी नोटों का इतिहास

भारतीय रुपया का इतिहास
भारतीय रुपया का इतिहास

जैसा कि हम सभी लोग जानते है भारतीय रुपए का शब्द संस्कृत के रुपिया शब्द से लिया गया है। रुपिया शब्द का अर्थ संस्कृत के में चांदी होता है। भारतीय रुपए का इतिहास बहुत पुराना है। जो भारत में छठी शताब्दी से चला आ रहा है। कांग्रेस ने कानूनी तौर पर 1861 में ब्रिटिश सरकार को बड़ी मात्रा में नोट जारी करने का अधिकार दिया था।

भारतीय मुद्रा का इतिहास सन 1862 में महारानी विक्टोरिया के सम्मान में विक्टोरिया के चित्र वाले बैंक नोट की श्रृंखला जारी की गई थी।

1 रुपय का नोट कब जारी किया गया था

Indian Rupee सन 1947 में भारत एक स्वतंत्र राज्य बन गया। और भारत ने फिर से अपने आधुनिक रुपए के डिजाइन को अपना लिया। भारतीय कागज के नोट पर लगाने के लिए। सारनाथ के चतुमूर्ख सिंह वाले अशोक के शीर्षस्थभ को चुना गया था। भारतीय मुद्रा का इतिहास में पहला बैंक नोट ₹1 का था और सन 1959 में भारतीय रिजर्व बैंक के ₹5 और ₹10 के नोट जारी किए जिस पर महात्मा गांधी का चित्र बना हुआ था। और बेहद चौंकाने वाली बात तो यह है कि भारतीय ₹10 के नोट पर चलती हुई नाव के चित्र वाले नोट को लगभग 40 वर्षों तक प्रयोग किया गया।

भारतीय रुपया  में सन 1959 में भारत में हज यात्रियों के लिए ₹10 और ₹100 के विशेष नोट जारी किए गए। ताकि सऊदी अरब के स्थानीय मुद्रा से उनका विनिमय हो सके।

सन 1917-1918 में हैदराबाद के निजाम को खुद की कांग्रेसी मुद्रा जारी करने का विशेषाधिकार दिया गया था

भारतीय मुद्रा का इतिहास में दूसरे विश्व युद्ध के बाद सिक्के बनाने वाले धातु की कमी हो गई। जिसकी वजह से भारत के 36 अलग-अलग स्टेट में कम मूल्य वाले कांग्रेसी नोट जारी किए गए। और इसे हरवाला नाम दिया गया।

INR क्या है और इसका क्या काम है

भारत की मुद्रा का कोड INR है भारत के मुद्रा यानी आईएनआर को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है

भारतीय केंद्र बैंक का क्या काम है

भारतीय केंद्र बैंक को रिजर्व बैंक कहा जाता है।भारतीय रुपया को केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। और अन्य सभी बैंकों को केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है।


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