श्वेतवसन अपराध

श्वेतवसन अपराध को रोकने के कोई चार उपाय बताइए । 

उत्तर– अब तक श्वेतवसन अपराधों की रोकथाम के लिए कानूनी एवं अन्य प्रकार के प्रयत्न नहीं हुए हैं । इन अपराधों से उत्पन्न दोषों की गम्भीरता को देखते हुए इनके निराकरण के लिए अग्रलिखित उपाय अपनाये जाने चाहिए

( 1 ) राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार के अपराधों की छानबीन के लिए जाँच आयोग की स्थापना की जानी चाहिए ।

( 2 ) सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोध समिति की स्थापना की जाए ।

( 3 ) इस प्रकार की समितियों से सम्बन्धित कर्मचारियों एवं अधिकारियों को जनता अपना सहयोग एवं समर्थन दे और वे श्वेतवसन अपराधियों के काले कारनामे सरकार के समक्ष लाएँ ।

( 4 ) सरकार द्वारा शवितशाली गुप्तचर विभाग की स्थापना की जाए ।

अपराध तथा श्वेतवसन अपराध में अन्तर बताइए ।

अपराध तथा श्वेतवसन अपराध में चार अन्तर लिखिए ?

उत्तर- अपराध , अपराध ही है चाहे वह निम्न वर्ग के लोगों द्वारा किया जाए अथवा समाज के प्रतिष्ठित एवं उच्च वर्ग के लोगों द्वारा । फिर भी सामान्य अपराध और श्वेतवसन अपराध की प्रकृति , मनोवृत्ति एवं आधारों में अन्तर पाया जाता है । यह अन्तर निम्नलिखित है

1. अपराध का सम्बन्ध समाज के सभी वर्गों से है , जबकि श्वेतवसन अपराध का केवल समाज के उच्च वर्ग से है ।

2. श्वेतवसन अपराध आर्थिक प्रकृति के होते हैं , जबकि सामान्य अपराध आर्थिक , राजनीतिक , सामाजिक एवं मानसिक किसी भी कारण से किये जा सकते हैं ।

3. श्वेतवसन अपराध में व्यक्ति प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँचती है , क्योंकि वह प्रत्यक्ष रूप से उसमें सम्मिलित नहीं होता है , जबकि अपराध में व्यक्ति को हीन एवं घृणा की दृष्टि से देखा जाता है , क्योंकि वह प्रत्यक्ष रूप से अपराध में सम्मिलित होता है ।

4. अपराध की अपेक्षा श्वेतवसन अपराध योजनाबद्ध रूप से किये जाते हैं ।

5. अपराध की तुलना में श्वेतवसन अपराध अधिक गोपनीय ढंग से किये जाते हैं ।

6. श्वेतवसन अपराध आधुनिक औद्योगिक एवं नगरीकृत समाजों की विशेषता है , जबकि अपराध आदिम और आधुनिक सभी समाजों में किये जाते हैं ।

7. सामान्यतः अपराध में अपराधी को दण्ड मिलता है , किन्तु श्वेतवसन अपराध में अपराधी अपनी आर्थिक स्थिति एवं जटिल कानूनी प्रक्रिया के कारण दण्ड से बच जाता है ।

8. श्वेतवसन अपराध व्यक्ति अपने व्यवसाय के दौरान करता है , जबकि अपराध व्यवसाय से बाहर भी । 9. अपराध के प्रति जनता की सामूहिक प्रतिक्रिया पायी जाती है , जबकि श्वेतवसन अपराध के प्रति नहीं

भ्रष्टाचार श्वेतवसन अपराध का स्रोत है । ” स्पष्ट कीजिए

उत्तर – वर्तमान समय में श्वेतवसन अपराध की वृद्धि का मुख्य कारण भ्रष्टाचार है । आज के समय में भ्रष्टाचार में वृद्धि के साथ – साथ व्यक्तियों में अलगाव की मनोवृत्ति प्रबल होने लगती है तथा वे स्वयं को अधिक असहाय , कमजोर तथा सार्वजनिक जीवन से कटा हुआ अनुभव करने लगते हैं । भ्रष्टाचार के कारण आज हमारे देश में राजनीति को राष्ट्रसेवा या समाज सेवा के स्थान पर एक व्यवसाय के रूप में माना जाने लगा है । भ्रष्टाचार के कारण ही अधिकांश नेता बहुत अधिक धन खर्च करके चुनाव जीत जाते हैं और सत्ता प्राप्त करने के बाद हर प्रकार की अपराधिक एवं समाज विरोधी गतिविधियों से अधिक – से – अधिक धन कमाने में लिप्त हो जाते हैं । अत : कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार श्वेतवसन अपराध का स्रोत है

श्वेतवसन अपराध से आप क्या समझते हैं । इसके कारणों का वर्णन कीजिए

श्वेतवसन अपराध का अर्थ तथा परिभाषा

श्वेतवसन अपराध वह अपराध होता है जो उच्च वर्ग के व्यक्तियों द्वारा किया जाता है , क्योंकि इन व्यक्तियों के पास धन की कोई कमी नहीं होती ; अतः ये व्यक्ति अपराध करके धन की आड़ में बच निकलते हैं । अधिकांशत : बड़े – बड़े सरकारी अधिकारियों , राजनेताओं तथा पुलिस का इन्हें सहयोग भी मिलता रहता है । बड़े – बड़े उद्योगपति , उच्च राजकीय पदाधिकारी , वकील तथा डॉक्टर इस श्रेणी में आते हैं । श्वेतवसन अपराध प्रतिष्ठित एवं उच्च सामाजिक पद वाले व्यक्तियों द्वारा किया जाने वाला अपराध है । इस संकल्पना का प्रयोग सर्वप्रथम सदरलैण्ड द्वारा किया गया । प्रमुख विद्वानों ने इसे निम्नवत् रूप से परिभाषित किया है ।

सदरलैण्ड के अनुसार , “ प्रतिष्ठित एवं उच्च सामाजिक पद के व्यक्ति के द्वारा अपने व्यवसाय के समय में किया गया अपराध ही श्वेतवसन अपराध है ।

हारटुंग के अनुसार , ” श्वेतवसन अपराध वह अपराध है जो समाज के उच्च आर्थिक वर्ग से सम्बन्धित होता है और साधारणतया शिक्षित व्यक्ति द्वारा किया जाता है ।

क्लीनार्ड के अनुसार , ” श्वेतवसन अपराध प्राथमिक रूप से उस कानून का उल्लंघन है जो व्यवसायी , पेशेवर लोग और राजनीतिज्ञों आदि जैसे समूहों द्वारा अपने व्यवसाय के सम्बन्ध में किया जाता है

श्वेतवसन अपराध की विशेषताएँ

सदरलैण्ड ने श्वेतवसन अपराध की निम्नलिखित विशेषताओं ( लक्षणों ) का उल्लेख किया है

( 1 ) श्वेतवसन अपराध उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त सामाजिक – आर्थिक वर्ग के व्यक्तियों के द्वारा किया गया अपराध है ।

( 2 ) श्वेतवसन अपराध में कानून का उल्लंघन बड़ी चतुरता के साथ किया जाता है ।

( 3 ) श्वेतवसन अपराधी अपनी प्रतिष्ठा के कारण कानूनी दण्ड से बच जाता है तथा उसकी प्रतिष्ठा पर कोई आँच नहीं आती ।

( 4 ) श्वेतवसन अपराध जनता के विश्वास की आड़ में किये जाते हैं ; अत : यह विश्वासघात पर आधारित अपराध है । निर्धन किसानों का साहूकार लोग इसी प्रकार शोषण करते हैं ।

( 5 ) अप्रत्यक्ष रूप से किये जाने के कारण श्वेतवसन अपराध का जनता द्वारा विरोध नहीं किया जाता है ।

( 6 ) श्वेतवसन अपराध समाज के लिए अधिक अहितकारी होते हैं ।

( 7 ) श्वेतवसन अपराधियों का सरकार और शासन के संचालन में भी हाथ रहता है , जिसके कारण उन्हें सजा दिलवाना सम्भव नहीं होता ।

( 8 ) श्वेतवसन अपराध आर्थिक क्षेत्र में अधिक होते हैं , जिनका उद्देश्य धन एकत्र करके विलासी जीवन बिताना होता है । ( 9 ) यह अपराध नेताओं , चिकित्सकों , न्यायाधीशों , शिक्षाविदों , व्यापारियों तथा इन्जीनियरों द्वारा अधिक किया जाता है ।

( 10 ) श्वेतवसन अपराध सोच – समझकर यत्नपूर्वक किये जाते हैं ; अत : इनका पता लगाना कठिन होता है ।

श्वेतवसन अपराध के विभिन्न स्वरूप या क्षेत्र

समाज में आज श्वेतवसन अपराध के निम्नलिखित स्वरूप या क्षेत्र देखने को मिल रहे है

व्यापारिक क्षेत्र में आज व्यापारिक जगत् में श्वेतवसन अपराध का बोलबाला है । लुभावने तथा झूठे विज्ञापन , पेटेण्ट , ट्रेडमार्क और कॉपीराइट का उल्लंघन , आर्थिक ठगी , सेल्स – टैक्स तथा आयकर की चोरी व श्रमिकों के साथ विश्वासघात व्यापारिक क्षेत्र में पनपने वाले श्वेतवसन अपराध हैं । भारत में व्यापारिक क्षेत्र में श्वेत अपराधों का बोलबाला है । शेयर निर्गत करने वाली कम्पनियाँ अपने शेयरों का मूल्य बढ़वाकर इसी प्रकार के अपराध में संलिप्त रहती हैं

2. प्रशासनिक क्षेत्र में प्रशासनिक क्षेत्र में सर्वाधिक श्वेतवसन अपराध होते हैं । उच्च अधिकार प्राप्त प्रशासनिक अधिकारी घूस लेकर , उपहार ग्रहण करके , ठेका छोड़कर , ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कराकर , लाइसेन्स तथा परमिट देकर श्वेतवसन अपराधों में लिप्त रहते हैं । उत्तर प्रदेश में जनवरी 1987 ई ० में आई ० ए ० एस ० अधिकारियों के घरों पर लगे सी ० बी ० आई ० के छापे इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं । भारत में गैस एजेन्सी देने , शराब के ठेके छोड़ने , परम्परागत पत्र बनाने तथा निर्यात लाइसेन्स देने में अधिकारी भारी सुविधा शुल्क लेकर श्वेतवसन अपराध करते हैं । 

  1. न्याय के क्षेत्र में -आज श्वेतवसन अपराध से न्यायिक क्षेत्र भी अछूता नहीं रह गया है । वकील , न्यायाधीश तथा एटानी न्याय – क्षेत्र में श्वेतवसन अपराध करते हैं । झूठी गवाही , दुर्घटना करने वाले दोषी व्यक्तियों का बचाव व हत्या करने वालों को जमानत देकर न्यायाधीश श्वेतवसन अपराध को क्रियात्मक रूप देते हैं । अनेक प्रभावशाली व्यक्ति धन देकर मुकदमों का निर्णय अपने पक्ष में करा लेते हैं
  1. चिकित्सा के क्षेत्र में – श्वेतवसन अपराध से चिकित्सा जैसा पबित्र व्यवसाय भी वंचित नहीं है । डॉक्टर का प्रतिष्ठापूर्ण व्यवसाय रोगियों को नवजीवन प्रदान करने वाला माना जाता है । डॉक्टर द्वारा झूठा प्रमाण – पत्र , झूठी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट , भ्रूण – हत्या तथा उल्टे – सीधे ऑपरेशन करके फीस वसूलने के कार्य इस क्षेत्र के श्वेतवसन अपराध हैं । 
  1. शिक्षा के क्षेत्र में -भारत में शिक्षा जैसा आदर्श क्षेत्र भी श्वेतवसन अपराध से नहीं बचा है । झूठी डिग्रियाँ , डॉक्टर की उपाधियाँ , उत्तर – पुस्तिकाओं में अंकों की हेरा – फेरी , परीक्षा के प्रश्न – पत्र लीक कराना , फेल छात्रों को उत्तीर्ण करना तथा परीक्षा भवन में ठेके पर नकल कराना आदि शिक्षा के क्षेत्र में श्वेतवसन अपराध हैं ।

श्वेतवसन अपराध के कारण

श्वेतवसन अपराध को जन्म देने वाले किसी एक कारण की ओर ही संकेत नहीं किया जा सकता , श्वेतवसन अपराध को अनेक कारण प्रोत्साहित करते हैं । श्वेतवसन अपराध के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी है 

  1. अत्यधिक वर्ग चेतना – सदरलैण्ड के अनुसार , अत्यधिक वर्ग चेतना और सामाजिक स्थिति के बारे में जागरूकता सफेदपोश अपराध का मुख्य कारण है । पहले से ही उच्च वर्ग के व्यक्ति अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाये रखने के लिए अपने व्यवसाय की आड़ में अधिकाधिक धनोपार्जन करने के लिए प्रेरित होते हैं 
  2. सामाजिक विभेदीकरण व आर्थिक असमानता -टैफ्ट तथा हारटुंग जैसे विद्वानों के अनुसार , श्वेतवसन अपराध सामाजिक विभेदीकरण वाले समाजों में ही अधिकतर होते हैं । सामाजिक , सांस्कृतिक व आर्थिक असमानता वाले समाजों में उच्च वर्ग के साथ – साथ मध्य स्तरीय व्यक्ति भी श्वेतवसन अपराध द्वारा लोगों को ठगने लगते हैं । जालसाजी , झूठा विज्ञापन , धोखाधड़ी , चोर – बाजारी आदि अपराध ऐसे समाजों में इसीलिए अधिक पनपते हैं । 
  3. पूँजीवादी व्यवस्था– -पूँजीवादी व्यवस्था भी श्वेतवसन अपराध को बढ़ावा देती है।सदरलैण्ड के अनुसार , पूँजीवादी समाजों में सम्पत्ति इने – गिने व्यक्तियों के हाथों में केन्द्रित होती है । धनी व पूँजीपति वर्ग धन के लालच में समाज , श्रम व सम्पत्ति का शोषण करता है । इस प्रकार चोर – बाजारी तथा अवैधानिक रूप से वस्तुओं का निर्माण पूँजीवादी व्यवस्था में श्वेतवसन अपराध के ही उदाहरण हैं । 
  4. भौतिकवादी मनोवृत्तियाँ -आज तकनीकी के साथ – साथ व्यक्ति का जीवन उत्तरोत्तर विलासिता की ओर बढ़ता जा रहा है । भौतिकवादी मनोवृत्तियों के कारण धन का महत्त्व निरन्तर बढ़ गया है , क्योंकि धन ही प्रतिष्ठा , मर्यादा व शक्ति का स्रोत बन गया है । अत : समृद्ध वर्ग श्वेतवसन अपराध करके भौतिक सुख – समृद्धि और विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करना चाहता है । 
  5. राजनीतिक कारण -बहुत – से देशों में राजनीतिक भ्रष्टाचार भी श्वेतवसन अपराध का एक कारण है । राजनीतिक नेता व सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि व मन्त्री पूँजीपतियों व अन्तर्राष्ट्रीय अपराधियों के साथ गठबन्धन करके श्वेतवसन अपराध को बढ़ावा देते हैं । अनेक राजनेता , मन्त्रीगण एवं जन – प्रतिनिधिअपने स्वार्थ के लिए चोरों , डाकुओं , तस्करों आदि का सहारा लेते हैं । इनका सम्बन्ध पूँजीपतियों एवं अपराधी गिरोहों से होता है । पकड़े जाने पर राजनेता अपराधियों को छुड़ाने में उनकी सहायता करते हैं । भारत में सांसदों की खरीद , यूरिया घोटाला , रंगीन टी ० वी ० घोटाला , हवाला काण्ड , चारा काण्ड , दवाई काण्ड , जमीन घोटाला राजनीतिक क्षेत्र के ऐसे ही श्वेतवसन अपराध हैं । अस्थिर राजनीतिक व्यवस्था वाले समाजों में अर्थव्यवस्था बड़ी ढीली हो जाती है , जो कि श्वेतवसन अपराधों को प्रोत्साहन देती है । भारत में श्वेतवसन अपराध का एक प्रमुख कारण यही है ।  
    1. कानूनों के प्रति अनभिज्ञता व कानूनी निष्क्रियता साधारण जनता कानूनों के प्रति अनभिज्ञ होती है , जिसका लाभ पूँजीपति तथा अन्य वर्ग व पदों पर आसीन व्यक्ति उठाते हैं । वे कानून से अनभिज्ञ व्यक्तियों का सरलता से शोषण कर लेते हैं । साथ ही कई समाजों में बाजार – वाणिज्य व उद्योग नियन्त्रण सम्बन्धी कानून इतने दोषपूर्ण व निष्क्रिय होते हैं कि बड़े – बड़े अपराधियों को पकड़े जाने का भय नहीं रहता । ये कानून श्वेतवसन अपराधियों को दण्डमुक्त रखने में सहायता देते हैं और इस प्रकार ऐसे अपराधों को बढ़ावा देते हैं । 

     

    1. सामाजिक मूल्य व संस्कृति – अनेक विद्वानों ( जैसे – क्लीनार्ड ) का मत है कि श्वेतवसन अपराधी का सम्बन्ध सामाजिक मूल्यों व संस्कृति से भी होता है । प्रत्येक समाज में कुछ ऐसे मूल्य व परम्पराएँ होती हैं जो व्यक्तियों को अपनी सत्ता व स्थिति कायम रखने के लिए प्रेरित करती हैं , जिनके कारण उच्च पदों के व्यक्ति गलत हथकण्डे अपनाकर तथा लोगों का शोषण करके अपने को आर्थिक दृष्टि से मजबूत करने का प्रयास करते हैं । 

     

    1. नैतिकता का अभाव -सामाजिक व धार्मिक जीवन में नैतिकता का अभाव भी श्वेतवसन अपराध का एक कारण है । आज धार्मिक विश्वासों व नैतिक नियमों के कारण उच्च स्थिति वाले व्यक्ति उन कार्यों को करना भी बुरा नहीं समझते जिनका सम्बन्ध भ्रष्टाचार व बेईमानी से है । अत : व्यक्ति अपने – अपने पदों का दुरुपयोग करके श्वेतवसन अपराध करने लगते हैं । 

     

    1. गोपनीय प्रकृति –अधिकतर श्वेतवसन अपराध की प्रकृति गोपनीय होती है तथा एक सीमा तक A करने पर ऐसे अपराध जनसाधारण के सामने आते ही नहीं हैं । गुप्त कार्य – प्रणाली के कारण बड़े – बड़े अधिकारी व कर्मचारी , व्यापारी वर्ग तथा पूँजीपति श्वेतवसन अपराध करते हैं और पकड़े जाने पर भी उनके विरुद्ध कोई सबूत नहीं मिलता है । 

     

    1. सामाजिक विघटन – सामाजिक विघटन भी श्वेतवसन अपराध को जन्म देता है । इसीलिए संक्रमण A काल से गुजरने वाले समाजों में श्वेतवसन अपराध भी अधिक होते हैं । हुए सामाजिक ढाँचे का सबसे अधिक लाभ बड़े – बड़े व्यापारियों को ही मिलता है , जो चोर – बाजारी , धोखाधड़ी , गबन , घूसखोरी व काला – बाजारी करके पैसा कमाने लगते हैं ।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

150FansLike
0FollowersFollow
2SubscribersSubscribe
- Advertisement -