सामाजिक विकास में महिला उद्यमिता की भूमिका

प्रश्न 1. भारत में महिला उद्यमियों के मार्ग में क्या बाधाएँ हैं ? 

उत्तर- हमारे देश में स्त्रियाँ सामाजिक – सांस्कृतिक बाधाओं के कारण विकासात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले पाती हैं , जबकि देश की लगभग आधी जनसंख्या महिलाओं की है । लोगों की आम धारणा है कि स्त्रियाँ अपेक्षाकृत कमजोर होती हैं और उन्हें व्यक्तित्व के विकास के समुचित अवसर नहीं मिल पाते । इसलिए वे शिक्षा , दक्षता , विकास और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ गयी हैं । भारत में महिला उद्यमिता के मार्ग में प्रमुखत : दो प्रकार की बाधाएँ या समस्याएँ हैं –

  1. सामाजिक – सांस्कृतिक समस्याएँ व 
  2. आर्थिक समस्याएँ । महिला उद्यमिता के क्षेत्र में सामाजिक – सांस्कृतिक समस्याएँ हैं- परम्परागत मूल्य , पुरुषों द्वारा हस्तक्षेप सामाजिक स्वीकृति तथा प्रोत्साहन का अभाव । ( 1 ) आर्थिक समस्याएँ – महिला उद्यमिता के मार्ग में आने वाली प्रमुख आर्थिक कठिनाइयाँ हैं – पंजीकरण एवं लाइसेन्स की समस्या , वित्तीय कठिनाइयाँ , कच्चे माल का अभाव , तीव्र प्रतिस्पर्धा एवं बिक्री की समस्या । इसके अतिरिक्त महिला उद्यमियों को अनेक अन्य बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है ; यथा – सृजनता व जोखिम मोल लेने की अपेक्षाकृत कम क्षमता , प्रशिक्षण का अभाव , सरकारी बाबुओं व निजी क्षेत्र के व्यापारियों द्वारा उत्पन्न अनेक कठिनाइयाँ आदि ।

उत्तर महिला उद्यमिता से आशय 

उद्यमिता शब्द की व्युत्पत्ति ‘ उद्यमी ‘ शब्द से हुई है । उद्यमिता का अर्थ किसी व्यवसाय या उत्पादन – कार्य में लाभ – हानि के जोखिम को वहन करने की क्षमता है । किसी भी व्यवसाय के लाभ – हानि का जोखिम अथवा अनिश्चितता ही उद्यमिता कहलाती है । इसे वहन करने वाले को ; चाहे वह स्त्री हो या पुरुष ; ‘ उद्यमी ‘ या ‘ साहसी ‘ कहते हैं । विभिन्न समाजशास्त्रियों ने उद्यमी को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है शुम्पीटर के अनुसार , “ एक उद्यमी वह व्यक्ति है जो देश की अर्थव्यवस्था में उत्पादन की किसी नयी विधि को जोड़ता है , कोई ऐसा उत्पादन करता है जिससे उपभोक्ता पहले से परिचित न हो । किसी तरह के कच्चे माल के नये स्रोत अथवा नये बाजारों की खोज करता है अथवा अपने अनुभवों के आधार पर उत्पादन के नये तरीकों को उपयोग में लाता है । ” नॉरमन लॉग के अनुसार , “ कोई भी व्यक्ति जो उत्पादन के साधनों के द्वारा नये रूप में लाभप्रद ढंग से आर्थिक क्रिया करता है , उसे एक उद्यमी कहा जाएगा । ” उद्यमी की उपर्युक्त परिभाषाओं के प्रकाश में महिला उद्यमी की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है कि “ महिला उद्यमी वह उद्यमी है जो एक व्यावसायिक या औद्योगिक इकाई का संगठन तथा संचालन करती है और उसकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास करती है । ” इस प्रकार महिला उद्यमिता से आशय , “ किसी महिला की उस क्षमता से है , जिसका उपयोग करके वह जोखिम उठाकर किसी व्यावसायिक अथवा औद्योगिक इकाई को संगठित करती है तथा उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने का भरपूर प्रयास करती है । ” वास्तव में , महिला उद्यमिता वह महिला व्यवसायी है , जो व्यवसाय के संगठन व संचालन में लगकर जोखिम उठाने के कार्य करती है । भारत में महिला उद्यमिता से आशय किसी नये उद्योग के संगठन और संचालन से लगाया जाता है । 

सामाजिक विकास में महिला उद्यमिता की भूमिका ( महत्त्व ) 

सामाजिक विकास से अभिप्राय उस स्थिति से है , जिसमें समाज के व्यक्तियों के ज्ञान में वृद्धि हो और व्यक्ति प्रौद्योगिकीय आविष्कारों के कारण प्राकृतिक पर्यावरण पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर ले तथा आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर हो जाए । समाज का विकास करने में सभी वर्गों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है । यदि महिलाएँ इसमें सक्रिय योगदान नहीं देती है , तो समाज में विकास की गति अत्यन्त मन्द हो जाएगी । महिलाएँ विविध रूप से सामाजिक विकास में योगदान दे सकती हैं । इनमें से एक अत्यन्त नवीन क्षेत्र , जिस पर अब भी पुरुषों का ही अधिकार है , उद्यमिता का है । प्रत्येक व्यवसाय या उत्पादन कार्य में कुछ जोखिम या अनिश्चितता होती है । इस जोखिम व अनिश्चितता की स्थिति को वहन करने की क्षमता को उद्यमिता कहते हैं और इसे सहन करने वाली स्त्री को महिला उद्यमिता कहते हैं ।

भारतीय समाज में महिला उद्यमिता की अवधारणा एक नवीन अवधारणा है , क्योंकि परम्परागत रूप से व्यापार तथा व्यवसायों में महिलाओं की भूमिका नगण्य रही है । वास्तव में , पुरुष प्रधानता एवं स्त्रियों की परम्परागत भूमिका के कारण ऐसा सोचना भी एक कल्पना मात्र था । ऐसा माना जाता था कि आर्थिक जोखिमों से भरपूर जीवन केवल पुरुष ही झेल सकता है , परन्तु आज भारतीय महिलाएँ इस जोखिम से भरे जीवन में धीरे – धीरे सफल और सबल कदम रखने लगी हैं । नगरों में आज सफल या संघर्षरत महिला उद्यमियों की उपस्थिति दृष्टिगोचर होने लगी है । दिल्ली नगर के निकटवर्ती क्षेत्रों में महिला व्यवसायियों और उद्यमियों में से 40 % ने गैर – परम्परागत क्षेत्रों में प्रवेश करके सबको आश्चर्यचकित कर दिया है । ये क्षेत्र इस प्रकार हैं ( 1 ) इलेक्ट्रॉनिक , ( 2 ) इन्जीनियरिंग , ( 3 ) सलाहकार सेवा , ( 4 ) रसायन , ( 5 ) सर्किट ब्रेकर , ( 6 ) एम्प्लीफायर , ट्रांसफॉर्मर , माइक्रोफोन जैसे उत्पादन , ( 7 ) सिले – सिलाये वस्त्र उद्योग , ( 8 ) खाद्य पदार्थों से सम्बन्धित उद्योग , ( 9 ) आन्तरिक घरेलू सजावट के व्यवसाय तथा ( 10 ) हस्तशिल्प व्यवसाय । बिहार जैसे औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्य में भी करीब 30 से 50 महिला उद्यमी हैं , जिनमें से दो तो राज्य के चैम्बर ऑफ कॉमर्स की सदस्या भी रही हैं । उत्तरी भारत में भी महिला उद्यमियों की संख्या बढ़ रही है । सरकार और निजी संस्थानों द्वारा इन्हें पर्याप्त सहायता और प्रोत्साहन भी दिये जा रहे हैं । पर्याप्त आँकड़े न उपलब्ध हो पाने के कारण महिला उद्यमियों की बदलती हुई प्रवृत्ति के आयामों और सामाजिक विकास में इनकी भूमिका का पता लगाना कठिन है , परन्तु महानगरों में यह परिवर्तन स्पष्ट देखा जा सकता है और पहले की अपेक्षाकृत छोटे नगरों में भी अब इनकी झलक स्पष्ट दिखायी देने लगी है । 

सामाजिक पुनर्निर्माण में महिला उद्यमियों का योगदान 

सामाजिक विकास में महिला उद्यमिता के योगदान का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के माध्यम से किया जा सकता है 

आर्थिक क्षेत्र में योगदान – महिला उद्यमिता उत्पादन में वृद्धि करके राष्ट्रीय आय में वृद्धि करती है । व्यवसाय और उद्योगों की आय बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है , जिससे आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है । इस प्रकार महिला उद्यमिता राष्ट्र के आर्थिक + क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देकर राष्ट्र का नवनिर्माण कर रही है । 

रोजगार के अवसरों में वृद्धि – महिला उद्यमिता द्वारा जो A व्यवसाय , उद्योग तथा प्रतिष्ठान स्थापित किये जाते हैं उनमें कार्य करने के लिए अनेक व्यक्तियों को आवश्यकता होती है । इनमें लगकर महिलाएँ तथा पुरुष रोजगार प्राप्त करते हैं । भारत जैसे विकासशील देशों में महिला उद्यमिता का यह योगदान बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रहा है उत्पादन में वृद्धि – भारत में महिला उद्यमिता की संख्या लगभग 18 करोड़ है । यदि यह समूचा समूह उत्पादन में लग जाए तो राष्ट्र के सकल उत्पादन में भारी वृद्धि होने लगेगी । यह उत्पादक श्रम निर्यात के पर्याप्त माल जुटाकर राष्ट्र को विदेशी मुद्रा दिलाने में भी सफल हो सकता है । इस प्रकार राष्ट्र की सम्पन्नता में इनकी भूमिका अनूठी कही जा सकती है । 

सामाजिक कल्याण में वृद्धि -महिला उद्यमिता द्वारा उद्योगों और व्यवसायों में उत्पादन बढ़ाने से वस्तुओं के मूल्य कम हो जाएंगे । उनकी आपूर्ति बढ़ने से जनसामान्य के उपभोग में वृद्धि होगी । उपभोग की मात्रा बढ़ने से नागरिकों के रहन – सहन का स्तर ऊँचा उठेगा , जो सामाजिक कल्याण में वृद्धि करने में अभूतपूर्व सहयोग देगा । . 

स्त्रियों की दशा में सुधार -भारतीय समाज में नारी को आज भी हीन दृष्टि से देखा जाता है । आर्थिक दृष्टि से वे आज भी पुरुषों पर निर्भर है । महिला उद्यमिता महिलाओं को क्रियाशील बनाकर उन्हें आर्थिक क्षेत्र में सबलता प्रदान करती है । महिला उद्यमिता समाज में एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण करके महिला – कल्याण और आर्थिक चेतना का उदय कर सकती है । इस प्रकार महिलाओं की दशा में सुधार लाने में इसको भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है ।

विकास कार्यक्रमों में सहायक – महिला उद्यमिता राष्ट्र के विकास कार्यों में अपना अभूतपूर्व योगदान दे सकने में सहायक है । बाल – विकास , स्त्री – शिक्षा , परिवार कल्याण , स्वास्थ्य तथा समाज – कल्याण के क्षेत्र में इसका अनूठा योगदान रहा है । 

नवीन कार्यविधियों का प्रसार – परिवर्तन और विकास के इस युग में उत्पादन की नयी – नयी विधियाँ और तकनीक आ रही हैं । महिला उद्यमिता ने व्यवसाय और उद्योगों को नवीनतम कार्य – विधियाँ तथा तकनीकी देकर अपना योगदान दिया है । उत्पादन की नवीनतम विधियों ने स्त्रियों के परम्परावादी विचारों को ध्वस्त कर उन्हें नया दृष्टिकोण प्रदान किया है । 

आन्तरिक नेतृत्व का विकास – व्यवसाय तथा उद्योगों में लगी महिलाओं को गलाघोटू स्पर्धाओं से गुजरना पड़ता है । इससे उनमें आत्म – विश्वास और आन्तरिक नेतृत्व की भावना बलवती होती है । यह नेतृत्व सामाजिक संगठन , सामुदायिक एकता और राष्ट्र – निर्माण में सहायक होता है । नैतिकता के मूल्यों पर टिका नेतृत्व समाज की आर्थिक और राजनीतिक दशाओं को बल प्रदान करता है । महिला उद्यमिता समाज में आन्तरिक नेतृत्व का विकास करके स्त्री जगत् में नवचेतना और जागरूकता का प्रचार करती है । 

प्रश्न 2. भारत में महिला उद्योग किन क्षेत्रों में विकसित हो रहे हैं ? भारतीय समाज में कामगार स्त्रियों की परिस्थिति में हो रहे परिवर्तनों को बताइए । समाज में कामकाजी महिलाओं की प्रस्थिति में हो रहे परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर – आधुनिक युग में भारत में महिला उद्यमिता को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला है । अब महिला उद्यमियों को केवल समान अधिकार ही प्राप्त नहीं हैं , बल्कि कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ भी प्रदान की गयी हैं । उदाहरण के लिए , महिला उद्यमियों को प्रत्येक विभाग में मातृत्व – अवकाश की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध है । सरकार द्वारा निजी उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए भी महिलाओं को अतिरिक्त सुविधाएँ एवं अनुदान प्रदान किये जाते हैं । इन सुविधाओं के कारण तथा सामान्य दृष्टिकोण के परिवर्तित होने के परिणामस्वरूप भारत में महिला उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है । आज लगभग प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं का सक्रिय योगदान है । शिक्षित एवं प्रशिक्षित महिलाएँ जहाँ सरकारी , अर्द्ध – सरकारी तथा गैर – सरकारी प्रतिष्ठानों में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं , वहीं अनेक महिलाओं ने निजी प्रतिष्ठान भी स्थापित किये हैं । अनेक महिलाएं सिले – सिलाये कपड़ों के आयात – निर्यात का कार्य कर रही हैं , प्रकाशन संस्थानों का संचालन कर रही हैं , रेडियो तथा टेलीविजन बनाने वाली इकाइयों का कार्य कर रही हैं । एक सर्वेक्षण के अनुसार नगरों में महिलाएँ जिन व्यवसायों तथा कार्यों से मुख्य रूप से सम्बद्ध हैं , वे निम्नलिखित हैं IST 

  1. स्कूलों व कॉलेजों / विश्वविद्यालयों में शिक्षण – कार्य । आएको 
  2. अस्पतालों में डॉक्टर तथा नर्स का कार्य 
  3. सामाजिक कार्य । 
  4. कार्यालयों एवं बैंकों में नौकरी सम्बन्धी कार्य । –
  5. टाइपिंग तथा स्टेनोग्राफी सम्बन्धी कार्य । – 
  6. होटलों व कार्यालयों में स्वागती ( Receptionist ) का कार्य । 
  7. सिले – सिलाये वस्त्र बनाने के कार्य । – 
  8. खाद्य पदार्थ बनाने , संरक्षण एवं डिब्बाबन्दी के कार्य । 
  9. आन्तरिक गृह – सज्जा सम्बन्धी कार्य । 
  10. हस्त – शिल्प जैसे परम्परागत व्यवसाय । 
  11. ब्यूटी पार्लर तथा आन्तरिक सजावट उद्योग । 
  12. घड़ी निर्माण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग । 
  13. पत्रकारिता , मॉडलिंग एवं विज्ञापन क्षेत्र । 
  14. इंजीनियरिंग उद्योग । 
  15. रसायन उद्योग आदि । ASH

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay in Touch

To follow the best weight loss journeys, success stories and inspirational interviews with the industry's top coaches and specialists. Start changing your life today!

spot_img

Related Articles