भारतीय मुद्रा का इतिहास
भारतीय मुद्रा का इतिहास

पहला कागज का नोट

जिस मुद्रा को आज हम रुपयों के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं। वो भारत में सदियों से चला आ रहा हैं। लेकिन उस समय भारत की मुद्रा चाँदी और सोने के सिक्के हुआ करते थे।

भारत में चाँदी और सोने के सिक्को का प्रयोग 18 वीं सदी तक किया गया। उसी दौरान जब यूरोपीय कम्पनियां भारत में व्यपार करने आने लगी तब इन्होने एक निजी बैंक की स्थापना की ताकि उन्हें व्यपार करने में आसानी हो। उसी दौरान चाँदी और सोने के सिक्कों की जगह कागजी मुद्रा को प्रयोग में लाया गया। भारत में पहला कागज का नोट कलकत्ता के बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान ने 1770 में जारी किया था।

भारत का केंद्रीय बैंक (Indian Rupee History) 

भारत में केंद्रीय बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक कहा जाता है। INR एक प्रबंधित नियम है जिससे बाज़ार को लेन-देन निर्धारित करने की अनुमति मिलती है। जिससे लेन-देन में कम अस्थिरता बनाए रखने के लिए फेर बदल का उपयोग किया जाता था।

भारत का प्रारंभिक सिक्का (Indian Rupee History)

भारत सिक्कों के सबसे पहले जारीकर्ताओं में से एक है। लगभग 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व पहले दस्तावेज वाले सिक्कों को ‘पंच-चिन्हित’ सिक्कों के रूप में निर्मित किया गया था

Indian Rupee History
Indian Rupee History

विभिन्न साम्राज्यों के उठने और गिरने के दौरान भारत के सिक्को की डिजाइन अगले कुछ सताब्दियों में बदलती गई। 12 वीं शताब्दी में टका के रूप में संदर्भित एक नई मुद्रा शुरुआत की गई। मुगल काल के दौरान एक एकीकृत मौद्रिक प्रणाली की स्थापना की गई थी और रजत रुपया पेश किया गया था। पूर्व-औपनिवेशिक भारत के राज्यों ने अपने सिक्कों

ब्रिटिश भारत में मुद्रा (Indian Rupee History)

1825 में, ब्रिटिश भारत ने रुपये के आधार पर एक रजत मानक प्रणाली को अपनाया और 20 वीं शताब्दी के अंत तक इसका उपयोग किया गया। हालांकि भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था, लेकिन इसने पाउंड स्टर्लिंग को कभी नहीं अपनाया। 1866 में, वित्तीय प्रतिष्ठान ध्वस्त हो गए और एक साल बाद कागज़ के पैसे का नियंत्रण ब्रिटिश सरकार में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसमें राष्ट्रपति पद के बैंकों को नष्ट कर दिया गया। उसी वर्ष विक्टोरिया पोर्ट्रेट श्रृंखला की नोट महारानी विक्टोरिया के सम्मान में जारी की गई थी और लगभग 50 वर्षों तक उपयोग में रही।

आधुनिक दिन (Indian Rupee history)

1947 में अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने और 1950 में गणतंत्र बनने के बाद, भारत के आधुनिक रूप (INR) को हस्ताक्षर के सिक्के के डिजाइन में बदल दिया गया।

Indian Rupee History
Rupee Symbol History

Indian Rupee को देश की एकमात्र मुद्रा के रूप में अपनाया गया था और अन्य घरेलू सिक्कों के उपयोग को प्रचलन से हटा दिया गया था। भारत ने 1957 में एक दशमलव प्रणाली को अपनाया। पाकिस्तान सहित कई दक्षिण एशियाई देशों में भारतीय मुद्राओं का प्रसार होता है।

INR क्या है?

INR भारत की मुद्रा का कोड है। भारत की मुद्रा/Indian Rupee को INR के नाम से जाना जाता है। भारत की मुद्रा यानी INR को (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 

भारत में नोट बंदी कब हुई 

भारत के प्रधान मंत्री (नरेंद्र मोदी) द्वारा अचानक किसी सम्बोधन के दौरान 8 नवम्बर 2016 को रात के 8 बजे भारत के समयनुसार 500 और 1000 के नोट को बंद करने का ऐलान कर दिया गया

Indian Rupee
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पुराना 500 रूपए का नोट
Indian Rupee
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पुराना 2000 रूपए का नोट

और इसे रात में टीवी द्वारा लोगों को बताया गया। उस दौरान लोगों को पैसा जमा करने अथवा बदलने के लिए बैंको में लम्बी-लम्बी लाइन का सामना करना पड़ा। और उसी समय 500 और 2000 की नए नोट की शुरुआत की गई।

500 रूपए का नोट
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500 रूपए का नोट
2000 रूपए का नोट
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2000 रूपए का नोट

500 और 1000 के नोट को बंद किया जाने का उद्देस्य केवल काले धन पर नियंत्रण करने और जाली नोटों से छुटकारा पाने के लिए किया गया था।

नोट बदलने के लिए स्याही का प्रयोग (Indian Rupee History)

जब एक ही व्यक्ति बार-बार लाइन में लगकर काले धन को सफ़ेद करने की कोसिस में लगे हुए थे और बैंक में भीड़ को बढ़ा रहे थे तब बैंको ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नोट बदलने वाले व्यक्ति के ऊँगली में अमिट स्याही लगाई गई।  ताकि एक व्यक्ति बार-बार लाइन में लगकर नोट न बदल सके। 

अमिट स्याही
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अमिट स्याही

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